"इतिहास - दृष्टि बदल चुकी है...इसलिए इतिहास भी बदल रहा है...दृश्य बदल रहे हैं ....स्वागत कीजिए ...जो नहीं दिख रहा था...वो दिखने लगा है...भारी उथल - पुथल है...मानों इतिहास में भूकंप आ गया हो...धूल के आवरण हट रहे हैं...स्वर्णिम इतिहास सामने आ रहा है...इतिहास की दबी - कुचली जनता अपना स्वर्णिम इतिहास पाकर गौरवान्वित है। इतिहास के इस नए नज़रिए को बधाई!" - डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह


06 June 2012

614th Anniversary of Sant Satguru Kabir – संत सत्गुरु कबीर का 614वाँ प्रकाशोत्सव

मेघ भगतों की सामाजिक संस्था भगत महासभा (Bhagat Mahasabha), जम्मू पिछले चार वर्ष से कबीर का प्रकाशोत्सव पैरेड ग्राऊँड, जम्मू में मनाती आ रही है. वर्ष 2010 में मैंने जम्मू में 612वें प्रकाशोत्सव का कार्यक्रम देखा था. मेघ भगतों का इतना बड़ा सामाजिक-धार्मिक समागम उससे पूर्व मैंने कहीं नहीं देखा था. 03-07-2010 को MEGHnet की यह पहली पोस्ट बनी. इससे पूर्व 10-06-2012 से मैं Megh Bhagat ब्लॉग लिख रहा था. (इसी बहाने याद आया है कि मेरी ब्लॉगिंग के दो साल होने को आए हैं.)

इस वर्ष भी जम्मू का पारा 44-45 डिग्री सेल्सियस के आसपास चल रहा था और आयोजन की तिथि (04-06-2012) की सूचना मिल चुकी थी. डॉ. ध्यान सिंह से बात हुई और हम दोनों जम्मू पहुँचे. वे इस कार्यक्रम को देखने के लिए बहुत उत्सुक थे. 03-06-2012 को सायं हम पैरेड ग्राऊँड में गए जहाँ भगत महासभा के कार्यकर्ता आवश्यक प्रबंध करा रहे थे. डॉ. ध्यान सिंह शोधकर्ता हैं. पैरेड ग्राऊँड में वे अपना कार्य जारी रखे हुए थे. वे लोगों से बातचीत करते रहे, सवाल पूछते रहे और जानकारी साझा करते रहे. उनका एक प्रश्न बहुतों के लिए चौंकाने वाला था जब उन्होंने पूछा कि आप कब से कबीरपंथी हैं. उनके इस कठिन प्रश्न के कई उत्तर आए जिन्हें किसी और अवसर पर लिखने के लिए रख छोड़ा है.

यह देख कर खुशी होती है कि भगत महासभा, जम्मू के कार्यकर्ता युवा हैं. जम्मू क्षेत्र में डॉ. राजेश भगत के नेतृत्व में एक बहुत बढ़िया टीम मेघों की सामाजिक और धार्मिक एकता के लिए सक्रिय है. यह लग़ातार काम कर रही है. सभी कार्यवाहियाँ टीम की भावना के साथ पूरी की जाती हैं. मेरी जानकारी के अनुसार, मेघों के किसी भी अन्य सामाजिक संगठन की अपेक्षा भगत महासभा का यह यूनिट अधिक कार्य कर पाया है और गाँव-गाँव में जा कर, लोगों से रूबरू हो कर एक वर्ष में बीसियों कार्यक्रम करने में सफल हुआ है. इसका मिशन मेघ भगतों को एक मज़बूत मंच देना है. प्राप्त अनुभव के साथ-साथ स्पष्ट दृष्टिकोण से यह टीम अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है.   

04-06-2012 को मुख्य कार्यक्रम था. तवी नदी गर्मी से गड़क रही थी और पैरेड ग्राऊँड तप रहा था. सुबह 10.00 बजे तक लोग आने शुरू हुए. डेढ़ घंटे में पंडाल भरने लगा. फिर जम्मू के आसपास के स्थानों/गाँवों से लोग पहुँचने लगे. तीन से चार हज़ार के आसपास लोग एकत्रित हो चुके थे. किसी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में मेघों का इतनी संख्या में पहुँचना और उन्हें देखना सुखद अनुभव था. (उल्लेखनीय है कि मेघों के अन्य संगठनों ने इस अवसर पर अलग-अलग स्थानों पर अपने कार्यक्रम आयोजित किए थे.)

इस बार भगत महासभा ने सत्संग और भजनों के कार्यक्रम के अतिरिक्त 90% से अधिक अंक पाने वाले होनहार छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथि और जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री श्री तारा चंद के कर कमलों से ट्राफियाँ दिलवा कर उनका सम्मान किया. ऐसे ही केएएस और आईएएस की परीक्षाएँ पास करने वाले युवाओं का भी सम्मान किया गया. इन युवाओं का उत्साह और आत्मविश्वास देखने योग्य था.

इस मौके पर डॉ. ध्यान सिंह, के मेघ भगतों (कबीरपंथियों) पर लिखे गए पहले शोधग्रंथ- ‘पंजाब में कबीरपंथ का उद्भव और विकास’- के महत्व को मान्यता देते हुए भगत महासभा ने उन्हें उप मुख्यमंत्री के कर कमलों से सम्मानित किया. डॉ. ध्यान सिंह को कई फोरम सम्मानित कर चुके हैं लेकिन उनके अपने समुदाय की ओर से किया गया यह सम्मान अपनी तरह का पहला था. जहाँ इस सम्मान का डॉ. ध्यान सिंह के लिए महत्व है, वहीं भगत महासभा, जम्मू बधाई की पात्र है और वह अपनी इस पहल पर गर्व कर सकेगी.

भगत महासभा ने उप मुख्यमंत्री महोदय से अपने धार्मिक-सामाजिक कार्यों और विकास के लिए माँगें रखीं. ईश्वर से प्रार्थना है और पूर्ण आशा है कि सरकारी मदद मिल जाएगी.

कई बातें शब्दों से बेहतर चित्र कहते हैं. इसलिए चित्रों से सुनिए :-

 
 
 
 
 
 
 
 
 


MEGHnet 

 

30 May 2012

Advocates are ruling - वकीलों का राज है भई



Advocates
टीम केजरीवाल ने 15 मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. आरोप लगाने वालों में और आरोप लगे मंत्रियों में बहुत से वकील हैं. यह तो (सांसद वकील)-बनाम-(एनजीओ वकील) की सनसनी हो गई. रुचिकर है और मैं बहुत प्रभावित हूँ.

सांसद के रूप में (आ)रोपित वकील मंत्रियों/सांसदों की संख्या कम नहीं. इनकी प्रैक्टिस अच्छी नहीं थी ऐसा तो कोई नहीं कहेगा. ये वकील का बाना पहन कर कोर्ट में जा सकते हैं. बिन बाने वाली प्रैक्टिस से भी इनका काम चलता रह सकता है यह महत्वपूर्ण है और देख कर सराहने वाली बात भी. देखने वालों की परेशानी यह है कि संसद से बाहर जी रहे वकील संसद के अंदर स्थापित वकीलों से इतने ख़फ़ा क्यों हैं? लोग इतना तो जानते हैं कि कंपिटीशन गला काट है.

पढ़ा है कि संसद में प्रश्न 'उठाने' के लिए पैसे लिए गए थे. संसद में प्रश्न को 'बैठाए' रखने या उठे प्रश्न को 'बैठाने' के लिए 'फीस' चलती है क्या? डॉक्टरों-दवा-कंपनियों-लैब्ज़ सरीखा प्रेम-बंधन वकीलों के धंधे में भी है क्या?

एक मित्र ने चुटकुला सुनाया था.- एक वकील दूसरे से बोला, “यार, बहुत प्रेशर पड़ रहा है. तुम्हारी उस क्लायंट कंपनी पर किसी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं. 'उठा' दूँ?” दूसरा वकीलबोला, “रुक जा. कंपनी से बात करने दे.” बात हो गई. कंपनी से कानूनी सलाह की 'फीस' पहुँच गई. सवाल 'उठने' से पहले ही 'बैठ' गया. न करप्शन, न फ़ालतू केस. फीस की 'फीस', शुद्ध मेहनत की.

(होश में हूँ. कृपया चुटकुले को चुटकुला और बाकी सभी पैराग्राफ़ को ब्लॉगर की बकबक समझा जाए, प्लीज़).

हरेक राजनीतिक दल के अपने 'प्रिय' विशेषज्ञ वकील होते हैं. जो दल सत्ता में आता है वो अपने स्पष्टतः संदिग्ध दिख रहे गैर-कानूनी और असंवैधानिक कार्यों पर अपने इन्हीं वकीलों से 'एक्सपर्ट सलाह' लेता है. एक सलाह की फीस आठ-दस लाख रुपए हो सकती है, ऑफ़ कोर्स पब्लिक के ख़ज़ाने से. कई बार मामले इतने टुच्चे होते हैं कि डीलिंग क्लर्क कुढ़ते हुए मुस्कराता है- ‘ले जा वकील भाई!!! आजकल तेरा टाईम चल रहा है’. सहमत-असहमत सी ब्यूरोक्रेसी अंग-संग रहती है. सभी संबंध पवित्रतः सरकारी हैं. इसमें कोई करप्शन है या नहीं, मैं नहीं जानता. वकील जाने या भगवान जाने.

बहुत लिख दिया, अधिक लिख कर मरना है क्या!!